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Fatwa #191 تصدیق شدہ فتویٰ (Verified)
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fatiha ka saboot | fatiha ka saboot quran aur hadees se

Questioner: Darul Ifta / Scholar: Verified Hanafi Fiqh Date: September 18, 2025
0 5,678

سوال (Question):

fatiha ka saboot | fatiha ka saboot quran aur hadees se

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ

الجواب و الشرعی حکم (Fatwa Answer):

fatiha ka saboot | fatiha ka saboot quran aur hadees se

अस्सलाम वालेकुम वरहमतुल्लाही वबरकातुह आज मैं आपको  ईसाले सवाब का सुबूत बताऊंगा | बहुत सारे लोग हैं जो फातिहा और ईसाले सवाब का इनकार करते हैं . इसलिए यह बातें आपके सामने पेश करना जरूरी है ताकि जब वह लोग इन चीजों का इंकार करें तो आप कुरान और हदीस के जरिए से उनके इंकार का जवाब दे सकें |

फातिहा और ईसाले सवाब

ईसाले सवाब यानि कुरान मजीद या दुरुद शरीफ या कलमा तय्यबा या किसी के अमल का सवाब दूसरे को पहुंचाना जायज है | इबादत चाहे माली हो या बदनी हो फ़र्ज़ और नफिल सबका सवाब दूसरों को पहुंचाया जा सकता है , जिंदो के इसले  सवाब से मुर्दों को फायदा भी पहुंचता है | हजरत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रजि अल्लाह ताला अनहु फरमाते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने फरमाया : मुर्दे की हालत कब्र में डूबते हुए फरियाद करने वाले की तरह होती है , वह इंतजार करता है की  उसके बाप या मा ,या भाई ,या दोस्त की तरफ से उसको दुआ पहुंचे ,और जब उसको किसी की दुआ पहुंचती है तो वह दुआ का पहुंचना उसको दुनिया और माफिहा से महबूब होता है |

ईसाले सवाब का सबूत | fatiha ka saboot

सरकार सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम और सहाबा e कराम की मुबारक  जिंदगियां हमारे लिए नमूना है| कि सहबा e  किराम के मामूलात से साबित है कि उन्होंने ईसाले सवाब किया है | हजरत साद रजि अल्लाह ताला अनहु की वालिदा का जब इंतकाल हुआ तो उन्होंने हुजूर की खिदमत में अरज  किया या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम मेरी वालिदा का इंतकाल हो गया है ,उनके लिए कौन सा सदका अफजल है .हुजूर ने इरशाद फरमाया :  पानी तो उन्होंने कुआं खोदया ,और कहा कि यह सा’द की मां के लिए है | एक आदमी ने हुजूर अकरम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम की कीमत में हाजिर होकर अर्ज किया या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम जब मेरी वालिदा जिंदा थे तो मैं उनके साथ नेकियां  किया करता था . अब उनकी वफात के बाद मैं उनके साथ कैसे नेकियाँ कैसे करूं | आपने फरमाया अब तेरा उनके साथ नेकी करना यह है कि तू अपनी नमाज के साथ उनके लिए भी नफिल नमाज पढ़ और अपने रोजों के साथ उनके लिए भी नफिल रोजे रख | जिंदो का तोहफा मुर्दों के लिए यही है कि उनकी बख्सिश की दुआ मांगी जाए | हदीस शरीफ में है कि अल्लाह ताला अहले जमीन की दुआ से कबर वालों को पहाड़ों के मिसल अजर अता फरमाता है | हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर रजि अल्लाह ताला अनहुमा फरमाते हैं की हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने फरमाया :  जो शख्स अपने वालिदैन की वफात के बाद उनकी तरफ से हज करे अल्लाह ताला उसके लिए जहन्नम से आजादी लिख देता है| और उसको कामिल हज का सवाब मिलता है और उसके वालिदैन के सवाब में भी कोई कमी नहीं होती | फिक्हे हनफी की  मशहूर ए जमाना किताब हिदाया में मौजूद है : जिसका कायदा e कुल्लिया  यह है कि इंसान के लिए जायज है कि अपने अमल का सवाब अपने अलावा को पहुंचा दे . चाहे नमाज हो या रोजा हो या सदका या उनके अलावा कोई भी अमल हो , यह अहले सुन्नत वल जमात का मजहब है | अक़ाइद की मशहूर किताब शरह e अक़ाइद e नसफी  में है की जिन्दों का मुर्दों के लिए दुआ करना और खैरात करना मुर्दों के लिए नफा का जरिया है | हजरत मुल्ला अली कारी शरह e बुखारी में तहरीर फरमाते हैं कि अहले सुन्नत का इस बात पर इत्तेफाक है कि मुर्दों को जिंदा के अमल से फायदा पहुंचता है . लिहाज़ा अगर कोई इनकार करता है तो उसकी कम इल्मी है |

कुरान ख्वानी के ज़रिये ईसाले e सवाब

हजरत अली रजि अल्लाह ताला अनहु से रिवायत है की हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने फरमाया : जो शख्स कबरों पर गुजरा और 11 बार सूरह इखलास पढ़कर उसका सवाब मुर्दों को बख्शा तो उसे मुर्दों की तादाद के बराबर सवाब मिलेगा | इमाम शाबी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं : अनसार का यह तरीका था कि जब उनका कोई इंतकाल कर जाता तो वह बार-बार उसके कब्र पर जाते और उसके लिए कुरान शरीफ पढ़ते | हजरत अल्लामा काजी सनाउल्लाह साहब पानी पति रहमतुल्लाह अलेह फरमाते हैं : तमाम फुक़हाये किराम ने हुक्म किया है की कुरान मजीद पढ़ने का सवाब मय्यित को जरूर पहुंचता है | हजरत शाह वालीउल्लाह रहमतुल्लाह अलेह फरमाते हैं : कुछ कुरान पढ़े और वालीदैन फिर उस्ताद, और अपने दोस्तों, और भाइयों और सब  मोमिनीन की रूहों को सवाब बख्शे |

तस्बीह और कलिमा पढ़ कर ईसाल e सवाब

हजरत जाबिर रजि अल्लाह ताला अनहु फरमाते हैं कि जब हजरत साद बिन मअ’ज  रजि अल्लाह ताला अन्हु  की वफात हुई तो हमने हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम के साथ उनके नमाजे जनाजा पड़ी | फिर उन्हें कब्र में उतार कर उन पर मिट्टी डाल दी गई , उसके बाद हुज़ूरसल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने तकबीर और तसबीह पढ़ना शुरू कर दी . हमने भी आपके साथ पढना शुरू कर दिया,  और देर तक पढ़ते रहे, किसी ने अर्ज किया या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि  वसल्लम आपने तकबीर और तस्बीह क्यों पड़ी तो आपने फरमाया :  इस नेक बंदे पर उसके कब्र तंग हो गई थी हमारी तकबीर और तस्बीह के जरिए से अल्लाह ताला ने उसके कब्र को चौड़ा कर दिया है |

सदका और खैरात से ईसाल e सवाब

हजरत आयशा सिद्दीका रजि अल्लाहु ताला अन्हा से रिवायत है कि एक आदमी ने हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम की खिदमत अक्मेंदस अर्ज की या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम मेरे वालिद ने वफात के वक्त कुछ वसीयत नहीं कि ,अगर मैं सदका करूं तो क्या उन्हें सवाब पहुंचेगा ? हुजूर सल्लल्लाहो ताला वसल्लम ने फरमाया : हां पहुंचेगा | हजरत साद बिन उबादा  की वालिदा का इंतकाल हो गया तो उन्होंने अर्ज की या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अगर मैं उनके तरफ से सदका करूं तो क्या उनको नफा पहुंचेगा ? हुजूर ने इरशाद फरमाया : हां पहुंचेगा | हजरत साद रजि अल्लाह ताला अनहु ने कहा तो फिर मेरा फुलां बाग उनकी तरफ से सदका है| तफसीर e खाजिन में है कि बे शक ओ शुबहा मय्यित  की तरफ से सदका देना मय्यित के लिए नफा पहुंचाने वाला है . और उस सदके का मय्यित को सवाब पहुंचता है और इस बात पर उलमा का इत्तेफाक है |

मय्यित के लिए क़ुरबानी का सवाब

हजरत आयशा सिद्दीका रजि अल्लाह ताला अन्हा से रिवायत है की  हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने कुर्बानी के दिन एक मेंढा ज़बह करके फरमाया अल्लाह इसे मेरी और मेरी आल की तरफ से और मेरी उम्मत की तरफ से कुबूल फरमा |

एक गलत रिवाज

आजकल यह आम रिवाज है कि तीजा दसवां और चालीसवां या वर्षी वगैरा के मौका पर बाकायदा दावत दी जाती हैं और बहुत एहतिमाम के साथ खाने का इंतजाम किया जाता है , जिसमें खास तौर पर अमीरों के लिए इन्तिज़ाम होता है . यह नाजायज है | फ़तहुल क़दीर में है अहले मय्यित  की तरफ से खाने के लिए ज़ियाफ़त  मकरूह ए तहरीमी है कि शरीयत में ज़ियाफ़त खुशी में रखी है ना कि गमी में | और यह बुरी बिदअत  है| हां अगर गरीबों और मोहताजों के लिए खाना पकवाया जाए और तमाम वर्षा आकिल  बालिग है और वह अपने माल से करें या मय्यित के तरके से करें तो यह अच्छा काम है |

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دارالافتاء اہل سنت (مسائل ورلڈ) تصدیق و تدوین: Verified Hanafi Fiqh