Fatwa #218
تصدیق شدہ فتویٰ (Verified)
Reader Font:
Qurbani ki fazilat ahadees ki roshani me | Qurbani ke masail
Questioner: Questioner
Darul Ifta / Scholar: Verified Hanafi Fiqh
Date: September 18, 2025
0
8,027
سوال (Question):
Qurbani ki fazilat ahadees ki roshani me | Qurbani ke masail
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
الجواب و الشرعی حکم (Fatwa Answer):
कुर्बानी की फ़ज़ीलत अहादीस की रोशनी में | Qurbani ke masail

सबसे अच्छी कुर्बानी कौन सी है
हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह ताला अनहु से रिवायत है उन्होंने फरमाया कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम को फरमाते हुए सुना : सबसे अच्छी कुर्बानी दुनबे के छोटे बच्चे की कुर्बानी है. मिश्कात शरीफ हजरत इमाम अहमद ने रिवायत की है कि हुज़ूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने फरमाया : कि सब से बेहतरीन कुर्बानी वह है जो क़ीमत के एतबार से आला हो और जानवर खूब मोटा और फरबा हो.कुर्बानी के दिन सबसे अच्छा अमल
हजरत आयशा सिद्दीका रजि अल्लाहु ताला अन्हा से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया : की अल्लाह ताला के नजदीक कुर्बानी के दिन इंसान के आमाल में सबसे ज्यादा पसंदीदा खून बहाना है . और बेशक वह जानवर कयामत के दिन अपनी सींघ बाल और खुर के साथ आएगा . और बेशक कुर्बानी के जानवर का खून जमीन पर गिरने से पहले ही वह अल्लाह तबारक व ताला की बारगाह में मकबूल हो जाता है . तो लोगों क़ुरबानी को दिल की भलाई के साथ करो तो उस पर तुम्हें सवाब मिलेगा और अल्लाह तबारक व ताला की बारगाह में क़ुबूल होगा. मिश्कात शरीफकुर्बानी करना यह जहन्नम की आग से हिजाब यानी पर्दा होगा
हजरत इमाम हसन बिना अली रजि अल्लाह ताला अनहुमा से रिवायत है की हुज़ूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया : जिसने खुशदिली से सवाब का तालिब होकर कुर्बानी कि वह जहन्नम की आग से हिजाब यानी रोक हो जाएगी . मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों कुर्बानी जाहिरी तौर पर एक जानवर को अल्लाह के नाम पर ज़बह कर देने का नाम है , लेकिन याद रखें कि कुर्बानी का मकसद सिर्फ जानवरों को ज़बह कर देना नहीं बल्कि हकीकत में कुर्बानी की रूह ये है कि बंदा एक खास फिदाकाराना जज्बे से अपने दिलो-दिमाग को मुनव्वर करके अपने अंदर ईसार , फ़िदाकारी , ईमानदारी ,निकोदारी , तक्वा और परहेज़गारी का कमाल पैदा करे . जैसा कि कुरान पाक में बिल्कुल वाज़ेह लफ्जों में कुर्बानी का मकसद बयान हुआ . अल्लाह ताला ने इरशाद फरमाया हरगिज़ हरगिज़ खुदा की बारगाह में ना कुर्बानियों का गोश्त पहुंचता है , ना उनका खून . अलबत्ता तुम्हारी परहेज़गारी और नेकोकारी जो दरबारे खुदा में पहुंचती है वही तुम्हारे लिए निजात का जरिया है. यही वजह है कि इस हदीस e पाक में फरमाया गया की खुशदिली के साथ सवाब के तालिब होकर कुर्बानी करो .लिहाज़ा पता चला कि कुर्बानी उसी वक्त हमें फायदेमंद होगी जब हम उसे खालिस नियत के साथ अदा करें क्योंकि हर अमल की तरह कुर्बानी के लिए भी जज़्शबा e इखलास शर्त है.कुर्बानी के दिन खर्च करना सबसे बेहतर सदका है
हज़रत इब्ने अब्बास रजि अल्लाह ताला अन्हुमा से रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने फरमाया जो रुपया ईद के दिन कुर्बानी में खर्च किया गया उससे ज्यादा कोई रुपया प्यारा नहीं ,पसंदीदा नहीं. तबरानी शरीफ मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों और बहनों हम दीन और दुनिया की जरूरियात के लिए अक्सर औकात कुछ ना कुछ खर्च करते रहते हैं . और अल्लाह की जानिब से हमें उस पर अजरे कसीर अता किया जाता है . लेकिन अल्लाह के हुक्म को मानते हुए ख़ुलूस e दिल से जो रुपया कुर्बानी के जानवर खरीदने के लिए खर्च किया जाए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के फरमान के मुताबिक वो रूपया अल्लाह के नजदीक सबसे ज्यादा महबूब और पसंदीदा है.माल होने के बावजूद कुर्बानी ना करे वह ईदगाह के करीब ना आए
हजरत अबू हुरैरा रज़िअल्लाहू तला अन्हू से रिवायत है की हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया : जिसमें उस’अत हो यानी जिसके पास माल हो और कुर्बानी न करें तो हमारी ईदगाह के करीब ना आए. इब्ने माजा मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों और बहनों हमारे नबी सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम सारी कायनात के लिए रहमत बनकर तशरीफ लाए ,उसके बावजूद हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम का गज़ब तो देखो इरशाद फरमाते हैं ” इसतीता’अत के बावजूद कुर्बानी ना करने वाला हमारी ईदगाह के करीब ना आए . अल्अलाहु कबर कितनी बड़ी बात है , अब जो लोग साहिबे इसतिता’अत होने के बावजूद कुर्बानी नहीं करते उन्हें इस हदीस से दरसे इबरत हासिल करते हुए अल्लाह की बारगाह में तोबा करना चाहिए और खुलूसे दिल के साथ अल्लाह के लिए कुर्बानी करनी चाहिए.कुर्बानी का जानवर जन्नत में सवारी होगा
एक साहब की आदत थी कि कुर्बानी के दिनों में बकरे की कीमत खैरात कर देते थे और यह कहते की कुर्बानी मुझ पर वाजिब है , मगर एक जानदार को बेजान करना क्या जरूरी है . एक रात उन्होंने ख्वाब में देखा कि कयामत कायम है और लोग अपनी अपनी सवारियों पर सवार होकर जन्नत की जानिब जा रहे हैं , वह साहब पैदल खड़े हैं आखिर उन्होंने एक शख्स से पूछा कि उन लोगों ने दुनिया में कौन सा ऐसा अमल और बेहतर काम किया है, जिसके बदले में आज यह नेमत उन्हें हासिल हुई है ? जवाब मिला कि उन लोगों ने राहे खुदा में जो कुर्बानियां की हैं वह कुर्बानियां आज उनकी सवारियां बनी हुई है . जब उठकर ख्वाब से बेदार हुए तो तोबा और इस्तिग्फार किया और फिर जिंदगी भर कुर्बानी करते रहे. मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों और बहनों इस वाक्य से बिल्कुल वाज़ेह है कि कुर्बानी के दिन कुर्बानी ही करना जरूरी है . ना की सदका या खैरात .और इस बात की वजह है कि कल कयामत के दिन कुर्बानी के जानवर कुर्बानी करने वाले के लिए सवारी होंगे , जिन पर वह सवार होकर जन्नत की तरफ रवाना होंगे . और जो लोग कुर्बानी नहीं करते वह इस स’आदत से महरूम होंगे.हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने कुर्बानी की
हजरत जाबिर रजि अल्लाहु ताला अन्हो से रिवायत है कि नबी ए करीम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने बकरा ईद के दिन सींघ वाले चित्कबरे खसी किए हुए 2 मेंढे ज़बह फरमाए .जब आपने उनको किबला की तरफ लिटा दिया तो फरमाया :मैंने अपना रुख उसकी तरफ किया जिसने जमीन और आसमान को पैदा फरमाया . दीने हनीफ पर चलते हुए , और मैं मुशरिकीन में से नहीं हूं .बेशक मेरी नमाज, मेरी कुर्बानी, मेरी जिंदगी और मौत अल्लाह के लिए है जो सारी कायनात का पालने वाला है ,उसका कोई शरीफ नहीं, और उसी का मुझे हुक्म दिया गया और मैं उसके सामने गर्दन झुकाने वालों में से हूं . अल्लाह यह तेरे लिए और तुझ ही से है ,मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम और उनकी उम्मत की जानिब से . अल्लाह के नाम के साथ ,अल्लाह सबसे बड़ा है .फिर आपने कुर्बानी के जानवर को ज़बह फरमाया. मेरे प्यारे दोस्तों अपने आका o मौला हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम के लुत्फ़ o कर्म को देखो कि आपने खुद अपनी उम्मत की तरफ से कुर्बानी फरमाई. लिहाजा कुर्बानी करने वाले मुसलमानों से अगर हो सके तो अपने प्यारे नबी सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम के नाम से भी कुर्बानी करें कि यह निहायत अजीम स’आदत की बात है. कुछ जगहों पर देखा गया कि मालिके निसाब ने अपनी तरफ से पुर्बानी ना करके हुजूर सल्लल्लाहो ताला वसल्लम की तरफ से कुरबानी की ,यह दुरुस्त नहीं बल्कि मालिक निसाब पहले अपनी तरफ से करे, और फिर अगर उसके अंदर ताकत है तो हुज़ूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम की तरफ से कुर्बानी करने के लिए दूसरे जानवर का इंतजाम करे.हजरत अली रजि अल्लाह ताला अनहू की कुर्बानी
तिरमिज़ी में हज़रात अखनश रज़िअल्सेलहु अन्हु से रिवायत है वह कहते हैं कि मैं ने हजरत अली रजि अल्लाह ताला अनहु को देखा कि वह 2 मेंढे की कुर्बानी करते हैं. मैंने कहा यह क्या है ? उन्होंने फरमाया कि रसूलूल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने मुझे वसीयत फरमाया की मैं हुजूर की तरफ से कुर्बानी करूँ .लिहाज़ा मैं हुजूर की तरफ से कुर्बानी करता हूं. मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों और बहनों इस हदीस ए पाक से यह पता चलता है कि हम अपने मरहूमीन के नाम से अगर कुर्बानी करेंगे तो अल्लाह ताला उसका सवाब उन्हें जरूर अता फरमाए गा . लिहाज़ा हम से जो साहिबे हैसियत हैं उन्हें चाहिए कि अपने मरहूमीन के नाम से भी कुर्बानी करें . और साथ ही अगर उनके अंदर ताकत और कुववत है तो हुज़ूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम के नाम से भी कुर्बानी करें , कि अल्लाह तबारक व ताला इसका बेहद अजरो सवाब अता फरमाए गा.पेश कश : अज़हर अलीमी
kya baap ki mojoodgi me bete par qurbani farz hai? Qurbani ke masail
Gair muslim ko qurbani ka gosht dena kaisa hai ? Qurbani ke masail
دارالافتاء اہل سنت (مسائل ورلڈ)
تصدیق و تدوین: Verified Hanafi Fiqh
Recent Fatawa
غوث پاک نے حضرت عزرائیل سے روح کا تھیلا چھین لیا یہ کہنا کیسا ہے؟
Read Fatwa
19
منگنی کی مجلس میں لڑکی کی طرف سے وکیل اور دوگواہوں کے سامنے مہر رکھ کر لڑکی سے اجابت لیکر
Read Fatwa
13
نفلی صدقہ /چندہ کا حکم از مفتی شان محمد مصباحی
Read Fatwa
11
مقتدی کو ترک واجب کا یقین ہو اور امام کو کچھ اندازہ نہ ہو تو نماز کا اعادہ کیا جاے
Read Fatwa
17
کسی وہابی دیوبندی یا گستاخ رسول کو امام بنانا کیسا ہے؟
Read Fatwa
9